जैन भूगोल में मध्यलोक का सर्वान्तरतम द्वीप — एक लाख योजन विस्तार वाली विशाल थाली, लवण समुद्र से वेष्टित, जिसके अक्ष पर सुदर्शन मेरु पर्वत स्थित है।
क्षेत्रों की चौड़ाई स्पष्टता हेतु संकुचित है (वास्तविक क्षेत्रफल-अंश प्रत्येक पर अंकित); मेरु की ऊँचाई घटाई गई है, परन्तु उसका आकार, वक्र पर्वत, सरोवर तथा गंगा/सिन्धु का प्रपात शास्त्रानुसार हैं।